सनातन वर्ष 2081आने में अभी समय है


 सनातन वर्ष 2081आने में अभी समय है


न तो सुरज अपनी राशि बदल रहा है ,

 न ही आज मौसम खुश मिजाज बदला है ।

न ही आज कोई महान पुरुष या भगवान के अवतार हुआ था।


फिर केसे नया साल 


मूढ़ बुद्धि और मूढ़ सिद्धांत फिर भी  दुनिया सर्वश्रेष्ठ संस्कृति में जन्म होकर भी हम लोग गलत सिद्धांतो के पक्ष में कैसे खड़े हो सकते है जरा सोचिए । 


माना बदलाव में समय लगेगा परंतु शुरुआत तो करो ।

दूसरे से नही खुद से करो ।


भारतीय  के संविधानिक कलेंडर में भी सनातनी कैलेंडर के रूप में ही निर्धारित है फिर भी हम अंग्रेजी साल का 2023  2024 का ही प्रयोग कर रहे है   

आप को पता है सनातन को नीचा दिखाने के लिए अंग्रेजो ने अप्रैल फुल जैसा प्रैंक बनाने का कॉन्सेप्ट बनाया और हम आज भी मुख बनते आए है  जरा विचार कीजिए 


कुछ सीखना है तो नेपाल से सीखिए हिंदू राष्ट्र है और वहा ऑफिशियली भी सनातन कैलेंडर का ही प्रचलन है 


अजी हमारा नया साल जब आता है पूरी संस्कृति ,पूरी प्रकृति,पूरा ब्रम्हांड  नया साल आने की  तैयारी करते है ।


पूरे विश्व में कही भी 6 ऋतु विराज मान नही होती केवल भारत 

में ही यह विराज मान होती है 

हमारे नए साल के समय सम्पूर्ण प्रकृति में वसंत ऋतु विराजमान होती है और उसका अनुभव केवल भारत भूमि में ही महसूस होती है जब सम्पूर्ण वृक्ष लता तरु वर अपनी पुरानी शाख पत्तियों को छोड़ नई पत्तियों को उगा लेती है

पूरी धरती में नए नए तितलियों के रंगीन के पंख लेकर मंडराते है, चारो ओर खेतो नई फसलों में फूल आने लगते है । सूरज की तेज होती हुई किरणों से हिमालय के ग्लेशियल पिघलने लगता है


नदियों में ग्लेशियरों के पिघलने से ताजा पानी बहने लगता है 


यही नहीं सूर्य भी पूरी  नक्षत्र मंडल का भ्रमण कर अपने नई परिक्रमा के पथ पर आजाता है मतलब  मेष राशि में आ जाता है ।यही नहीं चंदा मामा भी नए साल की शुरुआत में में अश्विनी नक्षत्र और मेष राशि में आ जाता है 

यही नहीं नए साल में हमारे प्रभु श्री राम का जन्म दिन भी आया है  जिन्हे मनुष्य योनि के आदिम पिता के रूप में जाना जाता है और क्या चाहिए  मैं तो हमेशा से अपने पूर्वजों के रास्ते में चलने का प्रयास करता हु। 

ये सभी बाते  हमारे सबके पूर्वज जानते थे मगर गलत मार्गदर्शन से सब कुछ क्षति ग्रस्त हो गया है ।जब पुराने समय में लोग नए साल के आते ही नए कपड़े लेने बाजार जाते थे उस समय 2 जोड़ी कपड़े में साल निकल जाता था क्युकी उस समय लोगो में शिष्टाचार और संस्कार परिपूर्ण होते थे आज जिसका अभाव है 

त्योहारों को मानने का नजरिया बदले दिखावे के लिए खर्चा कम करिए  और अपने लोगो को समय दीजिए ।


भारतीय वर्ष में  सौर महीने में 30 दिन के पीछे  वैदिक विज्ञान है और चंद्र मैंने में तिथि घटने बड़ने में भी वैदिक सिद्धांत शत प्रतिशत सही होता है फिर भी आज कई भाई हमारे सनातन ज्ञान को पंडितो पाखंड का ज्ञान बोलकर अपमानित करते नजर आते है 😴

सोच बदल अपने संस्कृति को सम्मान दिलाने का काम करे।

जय श्री राम 


मेरा आग्रह है नया साल हम सनातनी चैत्र मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाए जो की 9 अप्रैल मंगलवार को शुरू होगा ।

उस दिन सभी सनातनी 1 पंचांग अपने घर पर लेकर आए और प्रातः कालीन पूजा के बाद मिस्री और नीम के पत्तो का भोग लगा कर सभी को वितरण करे । अपने संतान को  सनातनी शिक्षा से संस्कारित करे ।और हा इसी साल से नए  साल से अपना जन्म दिन तिथि के अनुसार मनाए न की अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से,


 देश तो आजाद हो गया लेकिन अभी भी हम अंग्रेजो की चलाई मलेछ कानून व्यवस्था को संस्कारित नही कर पा रहे है कृपया  सभी मित्र अपना जन्म दिन ,तिथि के अनुसार ज्ञात करने के लिए  अपना date of birth comment करे । तथा सभी मित्रो से मेरा निवेदन है सभी लोगो को उनकी खुद की जन्म तिथि याद हो सनातन वाली न की अंग्रेजो वाली 


जय श्री राम 🚩🚩🚩संकलन करता आचार्य घनश्याम कृष्ण चट्टोपाध्याय

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